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नमस्कार, नमस्कार दोस्तों, कैसे हैं आप सब? उम्मीद है परीक्षा की तैयारी अच्छी चल रही होगी? ये ‘परीक्षा पे चर्चा’ का पहला virtual edition है. आप जानते हैं, हम पिछले एक साल से कोरोना के बीच जी रहे हैं, और उसके कारण हर किसी को नया नया इनोवेशन करना पड़ रहा है. मुझे भी आप लोगों से मिलने का मोह इस बार छोड़ना पड़ रहा है, और मुझे भी एक नए फॉर्मेट में आपके बीच आना पड़ रहा है.

और आपसे रूबरू न मिलना, आपके चेहरे की खुशी न देखना, आपका उमंग और उत्साह न अनुभव करना, ये अपने आप में मेरे लिये एक बहुत बड़ा loss है. लेकिन फिर भी परीक्षा तो है ही है, आप है, मै हूं, परीक्षा है, तो फिर अच्छा ही है की हम परीक्षा पे चर्चा continue करेंगे. और इस साल भी break नहीं लेंगे.

अभी हम अपनी बातचीत का सिलसिला शुरू करने जा रहे हैं. एक बात मैं शुरू में ज़रुर देशवासियों को भी बताना चाहता हूँ. और guardians को बताना चाहता हूं, teachers को बताना चाहता हूं, ये ‘परीक्षा पे चर्चा’ है. लेकिन सिर्फ़ परीक्षा की ही चर्चा नहीं है. बहुत कुछ बातें हो सकती हैं. एक हल्का-फुल्का माहौल बनाना है. एक नया आत्मविश्वास पैदा करना है. और जैसे अपने घर में बैठकर बातें करते हैं, अपनों के बीच बात करते हैं, यार दोस्तों के साथ बात करते हैं, आइए हम भी ऐसे ही बात करेंगे आज.

Question- 1-A.

M Pallavi, Govt. High School, Podili, Prakasam, Andhra Pradesh

नमस्कार honourable पी.एम. सर, (मोदीजी: नमस्कार नमस्कार)मेरा नाम एम. पल्लवी है, मैं 9 वीं कक्षा पढ़ रही हूं. सर, हम अक्सर ऐसा महसूस करते हैं कि पढ़ाई ठीक चल रही होती है लेकिन जैसे ही परीक्षाएं निकट आती हैं, बहुत ही तनावपूर्ण स्थिति हो जाती है. कृपया इसके लिए कोई उपाय बताएं सर. बहुत धन्यवाद सर.

धन्यवाद पल्लवी, मुझे बताया गया है कि इसी तरह का और भी एक सवाल है.

Question-1-B. –

Arpan Pandey – Global India International School, Malaysia

सादर अभिनंदन आदरणीय प्रधानमंत्री जी, मेरा नाम अर्पन पांडे है, मैं ग्लोबल इंडियन इंटरनेशनल स्कूल मलेशिया में 12वीं कक्षा का छात्र हूं. मैं आपसे अपनी भावी भविष्य की सफलता हेतु एक प्रश्न के उतर की आकांक्षा करता हूं. और आशा करता हूं कि आप इसमें मेरा मार्गदर्शन करेंगे. मेरा प्रश्न है, परीक्षा की तैयारी के दौरान हमारे मन में आने वाले भय और तनाव से हम कैसे उभरें? कि क्या होगा अगर अच्छे अंक, और अच्छा कॉलेज मिलेगा या नहीं? धन्यवाद.

Answer-

पल्लवी, अर्पण, देखिए, आप जब, ये fear की, डर की बात करते हैं तो मुझे भी डर लग जाता है. अरे ऐसी कौन सी बात है जिसके लिए डरना चाहिए? क्या पहली बार एग्जाम देने जा रहे हो क्या? क्या पहले कभी एग्जाम दी नहीं? क्या आपको मालूम नहीं था की मार्च महीने, अप्रैल महीने में एग्जाम आती है.

सब पता है! पहले से पता है. सालभर पहले से पता है. अचानक तो नहीं आया है. और जो अचानक नहीं आया है, कोई आसमान नहीं टूट पड़ा है.

इसका मतलब हुआ कि आपको डर एग्जाम का नहीं है. आपको डर किसी और का है, और वो क्या है? आपके आसपास एक माहौल बना दिया गया है, कि यही एग्जाम सब कुछ है, यही ज़िंदगी है और इसके लिए पूरा सामाजिक वातावरण कभी-कभी स्कूल का वातावरण भी, कभी-कभी मां-बाप भी, कभी अपने रिश्तेदार भी, एक ऐसा माहौल बना देते हैं, ऐसी चर्चा करते हैं कि जैसे कोई बहुत बड़ी घटना से आपको गुजरना है. बहुत बड़े संकट से गुजरना है, मैं उन सबसे कहना चाहूंगा, ख़ासकर के मैं parents से कहना चाहता हूं, आपने क्या करके रख दिया है?

मैं समझता हूं की ये सबसे बड़ी गलती है. हम आवश्यक्ता से अधिक over conscious हो जाते हैं. हम थोड़ा ज्यादा ही सोचने लग जाते हैं. और इसीलिए मैं समझता हूं कि ज़िंदगी में ये कोई आखरी मुकाम नहीं है. ये ज़िंदगी बहुत लंबी है, बहुत पड़ाव आते हैं, एक छोटा सा पड़ाव है. हमें दबाव नहीं बनाना चाहिए, चाहे टीचर हो, student हो, परिवारजन हो, यार दोस्त हो. अगर बाहर का दबाव कम हो गया, खतम हो गया, तो एग्जाम का दबाव कभी महसूस नहीं होगा confidence फलेगा-फूलेगा, pressure release हो जाएगा decrease हो जाएगा और बच्चों को घर में सहज तनावमुक्त जीना चाहिए. छोटी-मोटी, हल्की-फुल्की बातें जो रोज करते थे करनी चाहिए.

देखिये दोस्तों, पहले क्या होता था, पहले मां-बाप बच्चों के साथ ज्यादा involve रहते और सहज भी रहते थे. और कई विषयों पर involve रहते थे. आज जो भी involve रहते हैं वो ज्यादातर करियर, एग्जाम, पढ़ाई किताब, syllabus, मैं उसको सिर्फ़ involvement नहीं मानता हूं. और इससे इन्हें अपने बच्चों के असली सामर्थ्य का पता नहीं होता है, अगर मां-बाप ज्यादा involved हैं तो बच्चों की रुचि, प्रकृति, प्रवृत्ति, इस सबको अच्छी तरह समझते हैं, और जो कमियां हैं उन कमियों को समझ करके उसे भरने की कोशिश करते हैं.

और उसके कारण बालक का confidence level बढ़ता है. उसकी strength मां-बाप को पता है, उसकी weaknesses मां-बाप को पता है. और उसके कारण मां-बाप समझते हैं कि ऐसे समय weakness को बाजू में करो strength को जितना बल दे सकते हो दो.

लेकिन आज कुछ मां-बाप इतने व्यस्त हैं, इतने व्यस्त हैं, कि उन्हें बच्चों के साथ real sense में involve होने का समय ही नहीं मिलता. इसका परिणाम क्या होता है? आज बच्चे के सामर्थ्य का पता लगाने के लिये parents को एग्जाम के results का sheet देखना पड़ता है. और इसलिए, बच्चों का आंकलन भी बच्चों के results तक ही सीमित हो गया है. Marks के परे भी, बच्चे में कई ऐसी चीजें होती हैं जिन्हें parents mark ही नहीं कर पाते हैं.

साथियों, हमारे यहां exam के लिए एक शब्द है ‘कसौटी’. मतलब, खुद को कसना है. ऐसा नहीं है Exam आख़िरी मौका है. बल्कि Exam तो एक प्रकार से एक लंबी ज़िंदगी जीने के लिये अपने आपको कसने का उत्तम अवसर है. एक opportunity है. समस्या तब होती है, जब हम एग्जाम को ही जैसे जीवन के सपनों का अंत मान लेते हैं. जीवन मरण का प्रश्न बना देते हैं. दरअसल एग्जाम जीवन को घड़ने का एक अवसर है. एक opportunity है, एक मौका है. उसे उसी रूप में लेना चाहिए. Actually, हमें अपने आप को कसौटी पर कसने के मौके खोजते ही रहना चाहिए. ताकी हम, और बेहतर कर सके हमें भागना नहीं चाहिए.

आइए दोस्तों, अगले सवाल की तरफ बढ़ते हैं.

Question- 2-A.

Ms. Punyo Sunya – Vivekananda Kendra Vidyalaya, Papumpare, Arunachal Pradesh

माननीय प्रधानमंत्रीजी, नमस्कार(मोदीजी : नमस्कार)मेरा नाम Punyo Sunya है, मैं कक्षा ग्यारहवीं की छात्र हूं, मेरे विद्यालय का नाम विवेकानंद केन्द्र विद्यालय है, District Papumpare, State – Arunachal Pradesh है.

माननीय प्रधानमंत्रीजी, कुछ Subjects और कुछ Chapters हैं, जिनको लेकर मैं सहज नहीं हूं, और उनसे पीछा छुड़ाने में लगी रहती हूं. मैं चाहे कितनी भी कोशिश क्यों न करूं, मैं उन्हें नहीं पढ़ पाती. शायद यह इसलिए है, क्योंकि मुझे उनसे डर लगता है. सर इस स्थिति को कैसे दूर किया जा सकता है? धन्यवाद सर.

चलिए, आन्ध्र से हम मलेशिया, मलेशिया से अब अरुणाचल पहुंच गए और मुझे बताया गया है कि इसी प्रकार का कोई और एक सवाल भी है.

Question- 2-B

Ms. Vineeta Garg, SRDAV Public school, Dayanad Vihar, Delhi

(मोदीजी: नमस्कार)माननीय प्रधानमंत्री श्री नमस्कार, मेरा नाम विनीता गर्ग है, और में SRDAV Public school में पच्चीस वर्ष से कार्यरत हूं. मेरा प्रश्न है, कुछ subjects ऐसे हैं, जिनमें कई Students को डर का सामना करना पड़ता है, इस वजह से वो इनसे बचते हैं. इसके बारे में इतिहास या गणित जैसे विषयों के शिक्षक अच्छी तरह से समझ सकते हैं. टीचर के तौर पर इस स्थिति को और बेहतर बनाने के लिए हम क्या कर सकते हैं?

Answer-

ये कुछ अलग प्रकार का ही विषय मेरे सामने आया है, मैं कोशिश करूंगा कि students के मन को छू सकूं और टीचर्स की बात पर गौर के साथ कुछ समाधान बता सकूं. आप दोनों ने किसी खास subjects या chapter से डर की बात कही है. आप लोग अकेले नहीं हैं जिनको इस स्थिति का सामना करना पड़ता हो. हकीकत तो ये है कि दुनिया में एक भी इंसान ऐसा नहीं मिलेगा जिसके ऊपर ये बात लागू न होती हो.

मान लीजिए आपके पास बहुत ही बढ़िया 5-6 शर्ट हैं, लेकिन आपने देखा होगा 1 या 2 शर्ट आपको इतने पसंद आते होंगे, बार-बार पहनते हैं इसका मतलब ये नहीं बाकी बेकार हैं, फिटिंग ठीक नहीं है, ऐसा नहीं है, वो दो इतने अच्छे लगते हैं कि आप उसको बार-बारपहनते हैं. कई बार तो मां-बाप भी इन चीजों को लेकर गुस्सा करते हैं कि कितनी बार इसको पहनोगे? अभी दो दिन पहले तो पहना था.

पसंद-नापसंद मनुष्य का स्वभाव है और कभी-कभी पसंद के साथ लगाव भी हो जाता है. अब इसमें डर की, दुविधा की, क्या बात है कि हमने डरना चाहिए.

दरअसल होता क्या है, जब आपको कुछ चीजें ज्यादा अच्छी लगने लगती हैं, तो उनके साथ आप बहुत comfort हो जाते हो, बहुत comfortable लगता है वो, सहज हो जाते हैं. लेकिन जिन चीजों के साथ आप सहज नहीं होते, उनके तनाव में आपकी 80 प्रतिशत energy, आप उसी में लगा देते हैं. और इसलिए students से मैं यही कहूंगा कि आपको अपनी energy को equally distribute करना चाहिए. सभी विषयों में बराबर-बराबर, आपके पास पढ़ाई के लिए 2 घंटे हैं, तो उन घंटों में हर Subject को समान भाव से पढ़िए. अपने समय को equal distribute करिए.

साथियों, आपने देखा होगा टीचर्स, माता-पिता हमें सिखाते हैं कि जो सरल है वो पहले करें. ये आमतौर पर कहा जाता है. और Exam में तो ख़ासतौर पर बार-बार कहा जाता है कि जो सरल है उसको पहले करो भाई. जब टाइम बचेगा तब वो कठिन है उसको हाथ लगाना. लेकिन पढ़ाई को लेकर मैं समझता हूं, ये सलाह आवश्यक नहीं है. और उपयोग भी नहीं है. मैं जरा इस चीज को अलग नजरिए से देखता हूं.

मैं कहता हूं कि जब पढ़ाई की बात हो, तो कठिन जो है उसको पहले लीजिए, आपका mind fresh है, आप ख़ुद fresh हैं, उसको attend करने का प्रयास कीजिए. जब कठिन को attend करेंगे तो सरल तो और भी आसान हो जाएगा.

मैं अपना अनुभव बताता हूं, जब मैं मुख्यमंत्री था, जब प्रधानमंत्री बना, तो मुझे भी बहुत कुछ पढ़ना पड़ता है, बहुत कुछ सीखना पड़ता है. बहुतों से सीखना पड़ता है. चीजों को समझना पड़ता है. तो मैं क्या करता था जो मुश्किल बातें होती हैं, जिसके निर्णय थोड़े गंभीर होते हैं. मैं मेरे सुबह जो शुरु करता हूं तो कठिन चीजों से शुरु करना पसंद करता हूं. मुश्किल से मुश्किल चीजें मेरे अफसर मेरे सामने लेकर आते हैं, उनको मालूम है कि वो मेरा एक अलग मूड होता है, मैं चीजों को बिलकुल तेजी से समझ लेता हूं,निर्णय करने की दिशा में आगे बढ़ता हूं. मैंने अपना एक नियम बनाया है, कोशिश की है. और जो सरल चीजें हैं दिनभर की थकान के बाद रात देर हो जाती हैं तो चलो भाई अब उनको मैं ज्यादा दिमाग खपाने की जरुरत नहीं वो गलती होने का कारण नहीं है. उन चीजों को फिर में देर रात तक खींच लेता हूं. लेकिन सुबह जब उठता हूं तो फिर कठिन से ही मुकाबला करने निकल पड़ता हूं.

दोस्तों एक और बात, हमें अपने आप से सीखनी चाहिए. आप देखिए, जो लोग जीवन में बहुत सफल हैं, वो हर विषय में पारंगत नहीं होते. लेकिन किसी एक विषय पर, किसी एक Subject पर उनकी पकड़ जबरदस्त होती है.

अब जैसे लता दीदी हैं, लता मंगेशकरजी की पूरी दुनिया में नाम है, हिंदुस्तान की हर जुबा पर नाम है, लेकिन कोई जाकर के उनको कह दे कि आज हमारी क्लास में आइए और geography पढ़ाइए. हो सकता है वो ना भी पढ़ा पाए, पढ़ा भी पाए, मैं नहीं जानता हूं कि वे पढ़ा पाए, या ना पढ़ा पाए. लेकिन लताजी की महारथ geography में शायद न भी हो, लेकिन, संगीत की दुनिया में उन्होंने जो किया हुआ है, एक विषय पर जिस तरह अपना जीवन खपा दिया है, आज वे हर एक के लिए प्रेरणा का कारण बन गई हैं. और इसीलिए, आपको भले कुछ Subjects मुश्किल लगते हों, ये कोई आपके जीवन में कोई कमी नहीं है. आप बस ये ध्यान रखिए की इस मुश्किल लगने वाले Subject की पढ़ाई से खुद को दूर मत कीजिए. उससे भागिए मत.

वहीं टीचर्स के लिए मेरी सलाह ये है कि वो विद्यार्थियों से उनको टाइम मैनेजमेंट के संबंध में, उसके तौर-तरीकों के संबंध में, syllabus के बाहर जाकर भी कभी उनसे बातें करें, उनसे चर्चा करें. उनको गाइड करे. विद्यार्थियों को टोकने के बजाय, उन्हें गाइड करें. टोकना-रोकना उसका प्रभाव मन पे और ज्यादा negative फैलता है. प्रोत्साहित करने से वो concentrated ताकत के रुप में convert हो जाता है. कुछ बातें क्लास में सार्वजनिक तौर पर जरुर कहें ताकि सबका प्रबोधन होगा, लेकिन बहुत सी बातें ऐसी होती हैं जब किसी एक बच्चे को बुला करके चलते-चलते थोड़ा सर पे हाथ रख करके बहुत ही प्यार से कहें कि, देखो बेटे, देखो भैया, तुम इतना बढ़िया करते हो, जरा देखो इसको जरा थोड़ा ये कर लीजिए. देखिये तुम्हारे में बहुत बड़ी ताकत है. आप देखिए, ये बहुत काम आएगा. बहुत काम आएगा.

एक काम करिएगा. आपके जीवन में ऐसी कौन सी बातें थीं जो कभी आपको बहुत कठिन लगती थीं और आज आप उसको बड़ी सहजता से कर पा रहे हैं. ऐसे कुछ कामों की लिस्ट बनाइएगा, जैसे साइकिल चलाना कभी आपको कठिन लगा होगा. लेकिन अब वही काम आप बहुत सरलता से कर लेते होंगे. कभी तैरने की बात आई होगी बहुत डर लगा होगा, उतरने से भी डर लगा होगा लेकिन आप आज अच्छे से तैरना सीख गए होंगे. जो कठिन था उसको अपने convert कर दिया, आप के जीवन में ऐसी सैकड़ों चीजें होंगी, अगर आप ये याद करके जरा किसी कागज पर लिख लेंगे, तो कभी आपको किसी को भी, मुझसे भी कठिन वाला सवाल पूछना ही नहीं पड़ेगा. क्यूंकि कभी कोई चीज आपको कठिन लगेगी ही नहीं. मुझ पर भरोसा कीजिए दोस्तों एक बार करके देखिए.

Question-3. Neel Ananth, K.M. – Shri Abraham Lingdom, Vivekananda Kendra Vidyalaya Matric. Kanyakumari, Tamilnadu.

Honourable Prime Minister Ji, वणक्कम (मोदीजी: वणक्कम वणक्कम) I am studying 12th standard, in Shri Abraham Kingdom, Vivekananda, Matric. Kanyakumari.

Dear Sir, during this pandemic situation, have to the online situation, we all get more free time than usual. I would like to how, how can we do best use of our free time. My thanks to prime minister for giving me this opportunity.

Answer-

वणक्कम! मम्मी-पापा को पता चलेगा ना कि आप परीक्षा के समय में खाली समय की बात कर रहे हैं, तो फिर देखिएगा क्या होता है. खैर, मुझे ये सवाल बहुत अच्छा लगा कि आप exam के समय भी खाली समय पर ध्यान दे रहे हैं.खाली समय पे चर्चा कर रहे हैं. देखिए दोस्तों, खाली समय, इसको खाली मत समझिए ये खजाना है, खजाना. खाली समय एक सौभाग्य है, खाली समय एक अवसर है. आपकी दिनचर्या में खाली समय के पल होने ही चाहिए, वरना तो ज़िंदगी एक robot जैसी हो जाती है.

दरअसल खाली समय दो तरह के हो सकते हैं –

एक जो आपको सुबह से ही पता है कि आज आप 3 से 4 बजे तक फ्री हैं, या आने वाले रविवार को आप आधा दिन फ़्री हैं. या चार तारीख को छुट्टी है, आप दोपहर तक आपके पास कोई काम नहीं, आपको पता है. लेकिन दूसरा वो जिसका पता आपको Last Moment में चलता है. अगर आपको पहले से ही पता है कि मेरे पास खाली समय है, तो आप अपने parents या अपने बहन-भाई से कह सकते हैं कि, मैं आपकी हेल्प करूंगा. आपको क्या काम करना है, आप क्या कर रहे हैं, मैं क्या Help कर सकता हूं?

दूसरा आप सोचें कि ऐसी कौन सी चीजें हैं, जो आपको खुशी देती हैं.

थोड़ा भारी भरकम शब्द है – स्वान्त सुखाय. जिसमें से आपको सुख मिलता है आपको आनंद मिलता है, आपके मन को बहलाती हैं, आप ऐसा भी कुछ कर सकते हैं. अब आपने मुझे पूछा है तो मैं भी सोचता हूं कि मैं क्या करना पसंद करता हूं. मैंने अपनी दिनचर्या में Observe किया है कि अगर मुझे थोड़ा सा भी खाली समय मिल जाए और अगर झूला है, तो मेरा मन करता है कुछ पल मैं झूले पर जरुर बैठूं. बहुत थकान है और पांच मिनट का भी समय मिल गया, या फिर मैं कोई काम भी कर रहा हूं, तो अपने खाली समय में झूले पर बैठकर, पता नहीं क्या कारण है लेकिन मेरा मन प्रफुल्लित हो जाता है.

जब आप खाली समय Earn करते हैं, तो आपको उसकी सबसे ज्यादा Value पता चलती है. इसलिए आपकी Life ऐसी होनी चाहिए कि जब आप खाली समय Earn करें तो वो आपको असीम आनंद दे.

यहां यह भी ध्यान रखने की जरूरत है कि खाली समय में किन चीजों से बचना चाहिए, नहीं तो वो ही चीज़ सारा समय खा जायेगी, पता भी नहीं चलेगा और अंत में refresh-relax होने के बजाय आप तंग आ जाएंगे, थकान महसूस करने लगेंगे.

एक ओर मुझे लगता है कि खाली समय में हमें अपनी Curiosity जिज्ञासा, जिज्ञासा बढ़ाने की और ऐसी कौन सी चीजें हम कर सकते हैं जो शायद बहुत productive हो जाएगी. आपकी मां या पिता अगर खाना बना रहे हैं, उसे Observe कीजिए. नई-नई चीजों में अंदर जाने का, कुछ नया जानने का इसका impact सीधा-सीधा दिखाई नहीं देता है पर जीवन में इसका बहुत बड़ा गहरा प्रभाव होता है.

Free Time का एक और बेस्ट यूज़ हो सकता है कि आप कुछ ऐसी गतिविधियों से अपने आप को जोड़ें, जिसमें आपको express कर पाएं, आपकी uniqueness को बाहर ले आ सके.

जिसमें आप अपनी individuality से जुड़ सकें. ऐसा करने के बहुत से तरीके हैं. और आप भी ऐसे बहुत से तरीके जानते हैं. Sports है, music है, writing है, painting है, story writing है, आप बहुत कुछ कर सकते हैं.

अपने thoughts को, emotions को express करने का एक creative तरीका दीजिये. अवसर दीजिए. Knowledge का दायरा कई बार वहीं तक सीमित होता है, जो आपको उपलब्ध है, जो आपके आसपास है. लेकिन creativity का दायरा knowledge से भी बहुत दूर तक आपको ले जाता है. बहुत विस्तार के फलक पर ले जाता है. creativity आपको उस क्षेत्र में ले जा सकती है, जहां पहले कभी कोई नहीं पहुंचा हो, जो नया हो. हमारे यहां, कहा जाता है जहां न पहुंचे रवि वहा पहुंचे कवि. ये creativity की ही तो बात है.

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