संस्कृति मंत्रालय कला और कलाकार बिरादरी को बढ़ावा देने के लिए एक वैश्विक मंच प्रदान करने हेतु लाल किले में “भारत कला, वास्तुकला और डिजाइन बीएनेल” का आयोजन करेगा

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बीएनेल का उद्घाटन 8 दिसंबर को 9 से 15 दिसंबर तक पैनल चर्चाएं, कार्यशालाएं और कला बाजार के साथ प्रदर्शनियां आयोजित की जाएंगी और यह जनता के लिए खुली रहेंगी

बीएनेल के तहत लगने वाले मंडप 31 मार्च 2024 तक प्रदर्शित रहेंगे

बीएनेल प्राचीन, आधुनिक, समकालीन और तकनीक-संचालित कला, वास्तुकला और डिजाइन तक फैली हमारे देश की कलात्मक विरासत के समृद्ध चित्रपट का जश्न मनाने की अभिनव पहल: श्रीमती मीनाक्षी लेखी

संस्कृति मंत्रालय लाल किले पर भारत कला, वास्तुकला और डिजाइन बीएनेल 2023 का आयोजन कर रहा है, जिसका उद्घाटन 8 दिसंबर 2023 को किया जाएगा। उद्घाटन और वीआईपी पूर्वावलोकन के बाद, 9 दिसंबर से 15 दिसंबर तक पैनल चर्चा, कार्यशालाएं और कला बाजार के साथ प्रदर्शनियां आयोजित की जाएंगी और यह जनता के लिए खुली रहेंगी। अंतरराष्ट्रीय कलाकारों, वास्तुकारों और डिजाइनरों के मुख्य भाषण, सार्वजनिक कला प्रतिष्ठान, कला बाजार और सांस्कृतिक कार्यक्रम बीएनेल के प्रमुख आकर्षण हैं। बीएनेल के अंतर्गत लगने वाले मंडप 31 मार्च 2024 तक प्रदर्शित रहेंगे।

इंटरनेशनल म्‍यूजियम एक्सपो और फेस्‍टीवल ऑफ लाइब्रेरीज जैसे पिछले कार्यक्रमों की सफलता के आधार पर, बीएनेल एक प्रमुख वैश्विक सांस्कृतिक कार्यक्रम सृजित करने का इच्‍छुक है, जिसकी तुलना वेनिस, साओ पाउलो और दुबई के कार्यक्रमों से हो सके। लाल किला सहित भारत में पांच सांस्कृतिक स्थान स्थापित करने के प्रधानमंत्री के निर्देश से प्रेरित, आईएएडीबी’23 भारत की वैविध्‍यपूर्ण कला, वास्तुकला और डिजाइन को उजागर करने की एक अभिनव पहल है।

संस्कृति और विदेश राज्य मंत्री श्रीमती मीनाक्षी लेखी ने आज राष्ट्रीय संग्रहालय में कर्टन रेजर संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि बीएनेल पारंपरिक कारीगरों, समकालीन डिजाइनरों, क्यूरेटर और विचारकों सहित विविध रेंज का प्रदर्शन करता है। श्रीमती लेखी ने कहा कि बीएनेल प्राचीन, आधुनिक, समकालीन और तकनीक-संचालित कला, वास्तुकला और डिजाइन तक फैली हमारे देश की कलात्मक विरासत के समृद्ध चित्रपट का जश्न मनाने की अभिनव पहल है।

सप्ताह भर चलने वाला यह कार्यक्रम दैनिक विषयों पर आयोजित किया जाता है, जिनमें से प्रत्येक का उद्देश्य भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के विभिन्न पहलुओं को प्रदर्शित करना है। आईएएडीबी’23 में सात प्रतिष्ठित क्यूरेटर शामिल हैं, जो फिजीकल और डिजिटल प्रदर्शनियों, इंटरैक्टिव इंस्टॉलेशन, सत्र और पैनल चर्चाओं को जोड़ते हुए मनोरम अनुभव सुनिश्चित करते हैं। पूरे आयोजन के लिए एक समग्र कॉफी टेबल बुक के साथ-साथ प्रत्येक प्रदर्शनी में विशेषज्ञता से क्यूरेटेड कैटलॉग शामिल होंगे।

कार्यक्रम में क्यूरेटेड मंडप भारत की सांस्कृतिक विरासत के विविध पहलुओं के माध्यम से एक आकर्षक यात्रा प्रस्‍तुत करते हैं। श्री आदित्य आर्य “प्रवेश” के माध्यम से दरवाजों और प्रवेश द्वारों के प्रतीक तलाशते हुए आगंतुकों का मार्गदर्शन करते हैं। सुश्री अंजचिता बी. नायर द्वारा क्यूरेटेड “बाग-ए-बहार” मंडप ब्रह्मांड सरीखे बगीचों की अवधारणा का अन्‍वेषण करता है। श्री अमित पसरीचा “स्थापत्य” मंदिरों के कालातीत डिजाइन और वास्तुशिल्प लचीलेपन की खोज करते हैं। श्री रतीश नंदा और श्री विक्रमजीत रूपराय द्वारा क्यूरेटेड “संप्रवा” भारत में बावलियों पर केंद्रित है। सुश्री शिखा जैन और सुश्री एड्रियाना ए. गैरेटा ने भारत की स्वतंत्रता के बाद के वास्तुशिल्पीय वैभव का जश्न मनाने वाला मंडप “विस्मय” प्रस्तुत कर रहा है। श्री अनुभव नाथ लोक कला और डिजाइन परंपराओं का अन्‍वेषण करते हुए “देशज” प्रस्तुत करते हैं। अंतत:, सुश्री स्वाति जानू का क्यूरेट किया “समत्व” वास्तुकला में महिलाओं के योगदान का अन्‍वेषण करता है।

उपरोक्त के अलावा मंत्रालय ने सोशल मीडिया पर खुले आह्वान के माध्यम से कलाकारों और क्यूरेटरों को आईएएडीबी’23 के लिए अपना काम प्रस्तुत करने के लिए भी आमंत्रित किया। मंत्रालय को 560 प्रश्न और 260 प्रस्तुतियां प्राप्त हुईं, जिनमें से 150 प्रविष्टियां चुनी गईं और वे आयोजन स्थल पर प्रदर्शित की जाएंगी। समावेशिता के लिए आईएएडीबी के अधिदेश के संयोजन में, 9 दिसंबर से ललित कला अकादमी में एक छात्र बीएनेल भी आयोजित किया जा रहा है और यह उभरती प्रतिभाओं के लिए रचनात्मकता और कल्पना प्रदर्शित करने के एक मंच का काम करेगा।

इंडिया आर्ट, आर्किटेक्चर एंड डिज़ाइन बीएनेल एक अनोखा आयोजन होने जा रहा है जिसका उद्देश्य स्थापित और उभरते दोनों कलाकारों के लिए एक मंच प्रदान करके कलाकारों और डिजाइनरों के समुदाय को संगठित करना है। इसका लक्ष्य कला, वास्तुकला और डिजाइन के व्‍यवसायियों के बीच संवाद को बढ़ावा देकर सांस्कृतिक और रचनात्मक उद्योगों को ऊर्जा प्रदान करना है।