ये कील पैरों में नहीं किसानों की आँखों में चुभ रही हैं…

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किसानों को रोकने के लिए सरकारें रास्तों पर, नुकीली किले गाड़ रही है। यह किले किसानों के पैरों की जगह, उनकी आँखों में चुभ रही होंगी। उन्ही आँखों में जिनसे वो अपने लहलाते फसलों को देखकर नाचने-गाने लगते है। मैं कई दफा सोचता हूँ, अब उन आँखों का क्या होगा, जब वह वापस अपने खेत को लौटेगी, इन कील से लदी आँखों में क्या फिर से उनके सपनों की फसल उगेगी