राज्यसभा में कृषि कानूनों पर तीखी बहस: क्या बोले कृषि मंत्री

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संसद के बजट सत्र में राष्ट्रपति के अभिभाषण के बाद आज कृषि कानूनों पर बहस जारी है। पक्ष और विपक्ष के नेता अपनी – अपनी बातें राज्यसभा में रख रहे हैं। भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने बुधवार को हरियाणा के जींद में हुई महापंचायत में चेतावनी दी थी कि किसान आंदोलन और भी गर्मजोशी से जारी रहेगा।

इधर रिहाना और मिया खलीफा जैसी सेलिब्रिटीज ने किसान आंदोलन पर अपनी राय रखी जिसके लिए सरकार ने अपना विरोध दर्ज कराया। सरकार ने कहा है कि सरकार ने इसका विरोध किया है और दिल्ली पुलिस ने अंतरराष्ट्रीय साजिश के आरोप में जांच करने के लिए एफआईआर दर्ज की है। इन सारे मुद्दों को लेकर आज का दिन फिर संसद में हंगामेदार रहने वाला है। किसानों के मुद्दे पर राज्यसभा में बहस के लिए 15 घंटों का वक्त दिया गया था, जिसके लिए गुरुवार को 10 विपक्षी पार्टियों ने साथ में बैठक की है।

कांग्रेस के सांसद प्रताप सिंह बाजवा ने राज्यसभा में कहा में उन्होंने चर्चा के वक्त ही कहा था कि ये कानून किसानों के लिए डेथ वॉरंट हैं, लेकिन सरकार नहीं मानी। बाजवा ने कहा कि ‘जिस समय सितम्बर में तीन कृषि कानून पर राज्यसभा में चर्चा हो रही थी तभी मैंने ये कहा था कि किसानों के लिए डेथ वारंट है और वो कभी नहीं मानेगा। हमने वोटिंग की मांग की थीं लेकिन, सरकार नहीं मानी। बड़े कॉरपोरेट को फायदा पहुंचाने के लिए धोखे से सरकार ने कानून पास करवा लिया। ‘ बाजवा ने 12 सांसदों के गाजीपुर बॉर्डर पर जाने की अनुमति ना दिए जाने का मुद्दा भी उठाया।

कृषि बिल पर कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने भी अपनी बातें रखी उन्होंने कहा ‘विपक्ष इन कानूनों को काला कानून बताया है, हमने किसानों से चर्चा में पूछा कि इनमें काला क्या है, जिसे हम ठीक करें लेकिन किसी ने भी नहीं बताया.’

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