समाज में समाजकिता का आभाव

समाज के गठन का इतिहास है कि पहले लोग बिखरे हुए रहते थे, जिसमें उनकी सुरक्षा हमेशा खतरे में रहती थी। मानव ने अपने को सुरक्षित बनाने के लिए समाज का गठन किया और समूह बनाकर रहने लगे, जिसमें उनकी सुरक्षा मजबूत बन गई थी। समाज के सभी लोग समाज के हित के लिए ही कार्य करते थे। यदि सामाज में किसी व्यक्ति ने समाज के विरुद्ध कार्य किया तो पूरा सामाज उसका परित्याग कर देता था। उसे सामाज के किसी कार्यकर्मों के आयोजन में बुलाना बंद कर दिए जाते थे। । समाज में उसके परिवार के सदस्यों के शादी-विवाह बंद कर दिये जाते थे। वह व्यक्ति समाज में अलग थलग पड़ जाता था। समाज में इस भय के कारण कोई व्यक्ति अपराधिक कृत नहीं करता हैं। न्याय का रास्ता अपनाकर समाज के साथ सामंजस्य बना कर समाज में रहता हैं।
समय के परिवर्तन के साथ-साथ समाज के लोग समाज के नियमों का वंधन तोड़ने लगे और जान विरोधी कार्य करने लगे। सबसे दुखद बात तो यह हैं कि समाज धीरे धीरे जन विरोधी कार्य करने वाले लोगों का साथ देने लगा। जन विरोधी कार्य करने वाले व्यक्तियों का सम्मान देने लगा। इसका परिणाम यह हुआ कि दिन प्रतिदिन आपराधिक प्रवृति के लोगों की संख्या में इजाफा होने लगा। किसी ने थी ही कहा कि
“बसे बुराई जासे उर, ताहि को सम्मान
भलो – भलो कह छोड़िए, खोटे गृह जप दान”
पहले अपराधी समांतर सरकार भी चलाने लगें। आज अपराधी स्यंव सरकार बनाने का प्रमाण कर रहे है।
कहावत है-
“समय समय की बात है , समय समय का योग
समय समय पर लाखों में बिकने लगे दो कौड़ी के लोग”
वर्तमान में हम कुछ ऐसे लोगों को लोकसभा , विधानसभा में चुनकर भेजने लगे है। जिन्हे जेल में होनी चाहिए।
हम ऐसे लोगों के गले में माला डाल रहे हैं, जिनके गले में फाँसी का फंदा होना चाहिए। हम ऐसे लोगों की जय-जय कार कर रहे हैं,जिन्हें कोसा जाना चाहिए। वर्तमान स्थिति को देखकर किसी ने ठीक ही कहा है:-
“सब आए एक ही देश के, उतरे एक ही घाट
हवा लगी संसार की, हो गई बारह बाट”
लेखक
लालमणि शर्मा (रिटायर्ड टी. आई- ग्वालियर)