नोएडा: जिला अस्पताल का बुरा हाल, किसी मरीज का रस्सी बांधकर इलाज तो किसी को गेट से भेज रहे वापिस

अस्पतालों में इमरजेंसी वार्ड इसलिए बनाए जाते हैं ताकि 24 घंटे दिन रात इमरजेंसी में आने वाले मरीजों का इलाज किया जा सके। लेकिन अगर यही इमरजेंसी वार्ड किसी का इलाज करने की जगह खानापूर्ति करना शुरू कर दें तो? आइए जानते हैं पूरी खबर…

दरअसल नोएडा के इमरजेंसी वार्ड में मरीजों को इलाज मिलना मुश्किल हो गया है। मामला सेक्टर 30 स्थित जिला अस्पताल का है जहां की इमरजेंसी में देर रात आ रहे मरीजो को या तो बिना इलाज के वापस लौटाए जा रहा है या दिल्ली और अन्य अस्पतालों के लिए रेफर किया जा रहा है।

वहीं अस्पताल के पास में बने चाइल्ड पीजीआई के मरीजों ने आरोप लगाया कि उनके बच्चे को इमरजेंसी में इलाज करवाने के लिए 350 की बजाए 11 सौ रुपए जमा करवाए गए हैं। वहीं करीब दो हफ्ते पहले 10 महीने के बच्चे की चाइल्ड पीजीआई में मौत हो गई थी। जिसपर बच्चे के घरवालों ने आरोप लगाया था कि इमरजेंसी में होते हुए भी डॉक्टर बच्चे को देखने नहीं आए और तबीयत बिगड़ती गई।

एनबीटी की खबर के मुताबिक जब उनकी टीम मंगलवार को जिला अस्पताल पहुंची थी तब इस बात का खुलासा हुआ, वहीं अस्पताल में एक मरीज को रस्सी से बांधकर उसका इलाज किया जा रहा था।

इसके अलावा मंगलवार रात करीब 9 बजे जिला अस्पताल में एक शख्स 8 साल के बच्चे को गोद में उठाए आ रहा था। बच्चे का एक्सिडेंट हुआ था, लेकिन हालत खराब होने के बावजूद गार्ड ने उसे गेट से ही उल्टे पांव लौटा दिया। गार्ड ने अंदर लेने से इंकार करते हुए कहा कि यहां बच्चों का इलाज नहीं होता। परिजनों ने बताया कि हो गया है।

ऐसा ही बरताव जिला अस्पताल के स्टाफ ने एक बुजुर्ग के साथ भी किया। दादरी निवासी 75 वर्षीय बुजुर्ग को सांस लेने में परेशानी होने के चलते इमरजेंसी में भर्ती किया गया था। लेकिन स्टाफ ने हालत खराब होने के बावजूद उन्हे बेड देने की बजाए वीलचेयर पर बैठाकर ऑक्सिजन लगा दी। पत्नी ने रोते हुए बताया कि डॉक्टर ने यहां इलाज नहीं हो पाएगा। इन्हें दिल्ली लेकर जाओ। लेकिन दिल्ली लेकर जाने के लिए यहां ऐम्बुलेंस भी नहीं है।

अस्पताल वालों का मरीजों के साथ इस तरह का रवैया दिखाता है कि नोएडा जिला अस्पताल में मरीजों की जान के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। लेकिन प्रशासन इसपर गौर देने की बजाय आंखे मूंद कर बैठा है।

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