सरकार नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध, विशेषकर एमएसएमई क्षेत्र में: गडकरी

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केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों के मंत्री, श्री नितिन गडकरी ने आज “आत्मनिर्भर भारत” – “सोलर एंड एमएसएमई में अवसर” पर एक वेबिनार को संबोधित किया। वेबिनार का आयोजन संयुक्त अरब अमीरात में इंडियन पीपुल्स फोरम द्वारा किया गया था।

श्री नितिन गडकरी ने अपने संबोधन में कहा, “सरकार देश में नवीकरणीय ऊर्जा संसाधनों को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है, विशेष रूप से एमएसएमई क्षेत्र में”। उन्होंने कहा कि अच्छे ट्रैक रिकॉर्ड वाले एमएसएमई को अब पूंजी बाजार के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि स्क्रैपिंग पॉलिसी में निवेश के लिए बहुत बड़ा अवसर है। उन्होंने कहा कि भारत में बिजली उत्पादन के लिए असीम संभावना और क्षमता है। उन्होंने कहा कि भारत में सौर ऊर्जा की दर 2.40 रुपये प्रति यूनिट है और बिजली की व्यावसायिक दर प्रति इकाई 11 रुपये है और सौर ऊर्जा के माध्यम से उत्पन्न की गई सस्ती बिजली का उपयोग ऑटोमोबाइल और अन्य विकास के कार्यों के लिए किया जा सकता है। उन्होंने भरोसा जताया कि पांच साल के भीतर भारत दुनिया में ऑटोमोबाइल के लिए शीर्ष विनिर्माण केंद्र होगा। उन्होंने कहा, सौर ऊर्जा उपलब्ध करके हम इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए बड़ा बाजार तैयार करेंगे।

मंत्री ने विदेशी निवेशकों को भारतीय एमएसएमई क्षेत्र में निवेश करने के लिए आमंत्रित किया और उम्मीद जताई कि इससे एमएसएमई क्षेत्र को दुनिया का सबसे बड़ा विनिर्माण केंद्र बनने के कई अवसर मिलेंगे। एमएसएमई क्षेत्र को भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ बताते हुए, श्री गडकरी ने कहा कि यह क्षेत्र देश की जीडीपी में लगभग 30 प्रतिशत योगदान देता है और 10 करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार प्रदान करता है।

इस कार्यक्रम का उद्देश्य एमएसएमई को अपनी क्षमता दिखाने, अपने व्यापार के अवसरों का प्रदर्शन करने और ज्ञान के प्रसार की सुविधा प्रदान करने के लिए एक मंच प्रदान करना था। भारतीय अक्षय ऊर्जा क्षेत्र दुनिया का चौथा सबसे आकर्षक नवीकरणीय ऊर्जा बाजार है। भारत सौर ऊर्जा में पांचवें स्थान पर है और अक्षय ऊर्जा स्थापित क्षमता में चौथे स्थान पर है। सरकार ने इस दशक के लिए नवीकरणीय ऊर्जा और विशेष रूप से सौर ऊर्जा उत्पादन के लिए एक महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है। वर्ष 2030 तक नवीकरणीय ऊर्जा स्थापना का लक्ष्य 450 गीगावॉट है।